
चमक रहा है एक सितारा
पर वो दूर कहीं है
ख़ुद से ये पूँछ रहा हूँ
कहाँ खड़ा हूँ
ख़ुद से ये पूँछ रहा हूँ
कहाँ खड़ा हूँ,
ना इस ओर रास्ता
ना उस ओर उजाला
पर शोर बहुत है
ये चीख़ें किसकी हैं
पर यहाँ तो कोई नहीं है
आस पास सारा बंजर है
चमक रहा है एक सितारा
पर वो दूर कहीं है।
जाना मुझको उस तक है
पर पैरों में पड़ीं बेड़ियाँ
और साधन भी सारे ठप हैं
अब मैं खुद ही खुद में
उलझ रहा हूँ,
क्या मैं ही चीख रहा हूँ
पर मैं तो इक तिनका हूँ
किन धागों से छूटा
किन धागों को गूँथ रहा हूँ
कहाँ खड़ा हूँ
ख़ुद से ये पूँछ रहा हूँ
ना इस ओर रास्ता
ना उस ओर उजाला
इक सन्नाटे का कौतूहल है,
जो तोड़ रहा मुझको
पर फिर भी मैं क्यों चुप हूँ
खुद ही ख़ुद से हर गए हो
या सन्नाटे का खौफ है
अब बस ख़ुद से यही पूँछता
कहाँ खड़ा हूँ
क्या यही ख्वाबो की मंजिल है,
जो देखे तुमने घने अंधेरे
पर उन ख़ावों में भी था उजाला
पर ये सफर कौन सा
चुना है तुमने
ना इस ओर रास्ता
ना उस ओर उजाला
पर शोर बहुत है।
ये चीख़ें किसकी हैं
पर यहाँ तो कोई नहीं है
आस पास सारा बंजर है
चमक रहा है एक सितारा
पर वो दूर कहीं है।