यही बृहत दशा है यही हकीकत अब इस युग के राम की।

मारो मारो मारो मारो मारो मारो मारो
भागो भागो भागो भागो भागो भागो
ये शोर सुना जब हमने
देखा बीच सड़क पे
मर रहा एक इंसान बेचारा
मार रहे थे कुछ इंसान सयाने,
राम राम गूँज रहा था
जिनके अंदर खुद रावण है
वो मार रहे थे उसके रावण को
कल मिलकर सब
फिर मारेंगे इक और नए रावण को
जश्न मनेगा शोर उठेगा
पर चीख़ें भी गूँज रहीं होंगी
इस भू मण्डल में
कौन सुनेगा कौन सुनेगा
आँखों कानों पे सबके पट्टी
अंदर का रावण ,
रावण खौल रहा है
और वो भी ये जान रहा है
जिस दिन बोला मैं इनसे हटके
बीच सड़क पे लुग्दी
मेरी भी होगी
जब मरना ही है तो क्यों चुप हो
तुम जिंदा हो पर वो मर रहा है।
लठ्ठेतों की भीड़ में
वो निपट अकेला
देख रहा है सबमें रावण का चेहरा
मार उसके रावण को
फिर सब राम बन जायेंगे
कौन कहेगा मेरे अंदर भी है रावण
यही बृहत दशा है
यही हकीकत अब इस युग के राम की।
पकड़ो पकड़ो पकड़ो पकड़ो
बचाओ बचाओ बचाओ
जब ये चीख सुनी हमनें
देखा सुनसान सड़क पर
एक कन्या
दस दस दरिंदों के चँगुल में
देख रही हर में वो रावण का चेहरा है,
आस पास कुछ और दरिंदे
लिए कैमरा बने हैं पहरा।
यही बृहत दशा है
यही हकीकत अब इस युग के राम की।
सड़कें लहूलुहान हैं,
बेटियाँ घर में कैद
ये कैसी
राम राज की विपट कल्पना
कब हमने खुद से पूछा है
कि क्यों हम चुप हैं
है किस मुहूर्त का इंतजार
कब मरोगे अपना रावण तुम
कब हर बेटी में तुम

माँ सीता देखोगे
बन्द करो हर दशहरे
ये रावण रावण का खेल
बस इतना जो तुमने बोला
सड़को पे लग गया मेला
बाहर निकलो बाहर निकलो
कैसे ये तुमने बोला
हिम्मत कैसे हुई तुम्हारी
यही बृहत दशा है
यही हकीकत अब इस युग के राम की।

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