तमाशबीन राजा

राजा छठा हुआ तमाशेबाज है,अपनी प्रजा के मनोविज्ञान से अवगत है राजा जनता है कि अमीर गरीब ज्ञानी अज्ञानी कोई हों सब तमाशा घुस के देखते हैं।तमाशे बाजी से एक बार प्रजा के सम्मोहित होते ही राजा और प्रजा में टयूनिंग गजब की बन जाती है।राजा अगर सिर पीटने को भी बोले तो प्रजा ताली पीटने लगती है।राजा भी ठहरा गजब तमाशबीन उसने सुशासन के लिए तमाशाई शैली अपनायी।लोगों ने साफ पानी के लिए आवाज़ उठाई राजा ने बहती नदी पर हवाई जहाज तेरा दिया।बस्ती में आग लग गयी राजा ने आग में लगे गोल चक्कर से आर पार कूदना शुरू के दिया।प्रजा से महंगाई पर ध्यान देने को बोला राजा गुफा में ध्यान लगा कर बैठ गया।प्रजा ने स्कूल अस्पताल की मांग उठाई राजा ने पड़ोसी देश के आक्रमण का भय दिखाकर खाली बोतल में रख रख कर रॉकेट छोड़ने शुरू कर दिए।प्रजा काम की बात पूछती राजा मन की बात करने लगता।पर राजा जनता है तमाशा की अपनी खामी और खूबी दोनों हैं।
खूबी ये कि तमाशे के खेल में प्रजा मूल मुद्दा भूल जाती है।और खामी ये की हर बार नया दिखाना पड़ता हैं।

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