आजकल मिरे हिस्से
तुम्हारी कमीं सी क्यूँ है।
हर किस्से में आहट
तुम्हारी दबी सी क्यूँ है
रहते आस पास ही
पर बोलते कुछ नहीं
अब तुम भी बताओ
चेहरे पे ये तुम्हारे
इतनी नमीं सी क्यूँ है।
आजकल मिरे हिस्से
तुम्हारी कमीं सी क्यूँ है।
रूह में रूह बसती है
जिस्म में भी अंश तुम्हारा
जो तुम हो ख़ामोश इतने
तो मिरा बेहोश रहना लाज़मी
पर तुम बताओ धड़कनें तुम्हारी
इतनी थमी सी क्यूँ हैं।
रहते आस पास ही
पर बोलते कुछ नहीं
अब तुम भी बताओ
चेहरे पे ये तुम्हारे
इतनी नमीं सी क्यूँ है।
@The

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