सूखे तनों को मिल गयीं कोपलें
प्रतीक्षा अब भी जारी है
और खिल गए सब मौसमी फूल भी
प्रतीक्षा अब भी जारी है
सावन खड़ा रुख्सत होने को
प्रतीक्षा अब भी जारी है
कि कब आओगे लौटकर
ये चहकती कोयल
ये फूलों की कलियाँ कोमल
ये सरसराती हवाओं की महक
इतंजार में इक तुम्हारे
अधूरी फिजायें अब्तर सारी हैं,
इल्म दो या इल्जाम दो
इस बार हर बारी तुम्हारी है।@ThePoetryHouse