हाँ मैं अब सुकूँ चाहता हूँ…

हाँ मैं अब
सुकूँ चाहता हूँ,पर
मैं तुम्हें चाहता हूँ।
हाँ मैं अब घंटो की
नीद चाहता हूँ,पर
गोद तुम्हारी चाहता हूँ।
हाँ मैं अब और
जीना चाहता हूँ,पर
जिंदगी बस तुम्हारे
साथ चाहता हूँ।
हाँ मैं दूर बहुत दूर
जाना चाहता हूँ,पर
कंधे पर तुम्हारा
हाथ चाहता हूँ।
हाँ मैं अब
सुकूँ चाहता हूँ,पर
मैं तुम्हें चाहता हूं।
निःशंकोच बहुत
खामियाँ हैं मुझमें,पर
मैं हर शिकायत बस
तुमसे चाहता हूँ,
और बस शिकायत ही नहीं
मैं हर खामी की सजा
बस तुमसे चाहता हूँ।
हाँ मैं हर जंग
फतह कर लूँगा, बस
तुम्हारे चेहरे पर
मुस्तुकिल चाहता हूँ,
हाँ मैं हर ज़ख्म
सह लूँगा,बस
तुम्हारे होंठो पर
तबस्सुम चाहता हूँ।
हाँ मैं अब
सुकूँ चाहता हूँ पर
मैं तुम्हें चाहता हूँ।
@विकास डायरी

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