फिर मिलेंगे दोस्त।

उस दिन फोन कैसे कट गया पता नहीं,मुझे लगा तुमने काट दिया ,शायद तुम सोच रही होगी मैनें काट दिया।और कविता यूँ ही अनकही रह गई,खैर शायद अब तुम्हारी तरह अब तुम्हें कविता सुनाना अब नसीब में न हो।
बस यही सोचता हूँ फिर किसी मोड़ पर मिलेंगे
सारी कविताएं फिर एक साथ तेरे नाम पढेंगे।

मैं फोन दोबारा कर सकता था,पर उस आखिरी किए वादे को बिलखता कैसे छोड़ देता,वादा सांसे तोड़ देता तो शायद मैं भी। अब बो सिर्फ वादा नहीं उससे कहीं ज्यादा है।खैर कविता नसीब में होगी मेरे तो किसी दिन एक बड़े से इवेंट में तुम सामने बैठी होगी तब सुनाउँगा।
बाकी डायरी को तो हर रोज ही सुनाता हूँ।

बीते कुछ दिनों में मैन जो भी किआ उस सबके लिए माफ करना आसान नहीं होगा तुम्हारे लिए मुझे।मेरी सारी गलतियों केे लिए मुझे माफ़ तो नहीं किया जा सकता । शायद कभी नहीं।
बस एक ख़्वाहिश रखता हूँ , तुम्हें अपनी डायरी का किरदार हमेशा हमेशा के लिए रखने की इजाजत चाहता हूँ।और एक दोस्त भी चाहता हूँ,इजाजत हो तो तुम्हें हमेशा मेरी दोस्त कहना चाहता हूँ।
तुम बाकई दिल से लेकर हर एक चीज में बहुत खूबसूरत हो,बस एक तुम जैसा दोस्त चाहता हूँ, जानता हूँ ये हम दोनों के लिए आसान नहीं है।

तू मां गँगा सी पवित्र है
चाँद पर दाग सा मेरा चरित्र है
मर्यादा सी सखी हैं तेरी सहेलियाँ
एक कवि आवारा सा मेरा मित्र है।

हम दोनों कभी एक नहीं हो सकते ये मैं भी जानता पर मैं डरपोक था मैंने तो कोशिस भी नहीं की बस इसी बात का अफसोस ताउम्र रहेगा।एक दिन तो तुम चली ही जाती पर अचानक से तुम्हारा चले जाना मुझे बहुत तोड़ गया है। पर उस सब का गुनाहगार तो मैं ही हूँ, उसकी सजा अब झेल रहा हूँ।बस हर रोज यही कोशिस कर रहा हूँ ,अपने आप को जोड़कर रख पाऊँ।क्योंकि अब आगे का सफर तो पूरा करना ह,उसे पूरा करने के लिए बहुत मेहनत और तुम्हारे साथ की जरूरत होगी।तुम शयाद ही अब साथ निभा पाओ,तुम्हारे लिए भी आसान नहीं होगा।
तुमसे कोई शिकायत नहीं है,तुम्हारी जिन्दगी में जो भी शख्स आये, तुम्हें बहुत खुश रखे जो मैं कभी नही कर पाया।बस कुछ अफसोस अपने ऊपर हमेशा रहेंगें, और रहने भी चाहिए मुझे मेरी गलतियाँ याद दिलाते रहेंगे।

खैर जिंदगी तो छोटी ही होती है,उसमे से भी कुछ खूबसूरत लम्हे मेरे हिस्से बांध देना बाकई बहुत खास है मेरे लिए।
इस पर अगर मैं दोष नियति को दूँ, तो शायद अपने आपसे ही नाइंसाफी करूँगा।क्योंकि गलतियाँ तो मेरी ही थी।

फिर मिलेंगे दोस्त,

फिर मिलेंगे कहीं किसी और सफर में
फिर छोड़ेंगे यादें किसी और शहर में
चले तो इस बार भी थे मगर सागर सूखा था
अब जब मिलेंगे तो छोड़ेंगे नाव किसी और समंदर में।

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