नया नया जहांन चुन रहे हो तुम
जानता हूँ आसमान चुन रहे हो तुम
इस भीड़-भाड़ की बस्ती इंसाँ मुक्कमल नहीं
और भगवान चुन रहे हो तुम
और भगवान चुन रहे हो तुम।
जानता हूँ आसमान चुन रहे हो तुम
ये जिंदगी तुम्हारी है और फ़ैसले भी तुम्हारे
कुछ तजुर्बेकार हिदायद दे गए हैं
क्या कान लगा कर सुन रहे थे तुम,
दो गज जमीं से ताल्लुकात बनाये रखना
कुछ रिश्ते अपनों से सजाए रखना
ये नफरती हवाएँ निस्तो-नाबूत न कर दें
जड़ें जरा जमीं में धसाएँ रखना तुम
कुछ रिश्ते अपनों से बनाये रखना तुम।
@विकास डायरी