तुम साथ होते तो कितना बेहतर होता!

तुम साथ होते तो कितना बेहतर होता,
मैं थकता नहीं,मैं रुकता नहीं,
हर मुश्किल के आगे झुकता नहीं,
कूद जाता मैं हर समंदर में
बस हाथ में हाथ तुम्हारा होता।
तुम साथ होते तो कितना बेहतर होता,
रातें नींद लेकर आतीं,
सुबह एक सुनहरी धूप होती,
तुम साथ होते तो कुछ भी ना खोता।
तुम साथ होते तो कितना बेहतर होता
हर गम बाँट लेते हम,
खुशियों पे हक बस हमारा होता।
जिंदगी की रफ्तार भी थमती
वक्त भी ठहरा होता
खावों पर भी हमारा पहरा होता
जब आमने सामने हमारा चेहरा होता।
तुम होते तो कितना बेहतर होता।
आखिर अब भी क्यों नहीं समझा पाता
मैं खुद को
कि अब तुम नहीं हो
और अगर तुम नहीं हो तो ये ख़्वाब क्यों हैं
और अगर ख़्वाब हैं तो तुम क्यों नहीं हो
और अगर तुम नहीं हो तो ये एहसास क्यों हैं
और अगर एहसास हैं तो तुम क्यों नहीं
मेरे हर अलफ़ाज़ में बस तुम्हारा ही नाम क्यों है
और अगर तुम्हारा नाम है तो तुम क्यों नहीं
अब कौन है और कौन नहीं
अब ये खेल मुझसे और नहीं खेला जाता
अगर आने बाला अपने ख़्वाब लेकर साथ आता है
तो फिर जाने वाला इन्हें साथ लेकर जाना भूल क्यों जाता है।
आना जाना जरूरी है क्या
कोई आकर ठहर क्यो नहीं जाता है,

@विकासडायरी

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