तुझको मुझसा कोई ना चाहेगा
वस तुझे समझ मे आना बाकी है, मेरी दोस्त
दिल टूट गया तो रोना क्यों
यादों का खजाना अभी बाकी है,मेरी दोस्त
तेरी यादों की तेरी बातों की सौगात सजाये बैठे हैं
तेरे साथ बिताए लम्हों के जज्बात सजाये बैठे हैं
जब प्यार हमारा सच्चा था तो क्यों आंशू बर्बाद करें हम
हम तन्हाई और जाम के संग हर रात सजाये बैठे हैं
तेरी कमीं तो है लेकिन आँखों मे नमीं मेरे यार नहीं
तुझको बेवफा कोई कह दे ये भी स्वीकार मेरे यार नहीं
तेरी हर मजबूरी को तुझसे बेहतर जनता हूँ,
तेरी हर हँसी को तुझसे बेहतर पहचानता हूँ।
@विकास डायरी