तुम आ रहे हो ना।

सुनो!चाँद को रोका है
एक और रात के लिए
तुम आ रहे हो ना
मुलाकात के लिए
वक्त ना हो अगर
फिर इस बार भी
तो कोई गिला नहीं
बस एक टक तुम
आसमां देख लेना
मैंने घर बना रखा है
इसे आज रात के लिए
फुरसत गर इतनी भर
भी न मिले
तब भी कोई गिला नहीं
फिर उधार लेंगे आसमां
किसी और रात के लिए।

@विकासडायरी

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