माँ हिंदी और उर्दू
का मान बढ़ाने का
हुनर चाहता हूँ।
भले होंठ ख़ामोश रहें
लफ्ज़ भी मौन रहें
दिल की स्याही और
मन की कलम से
लिख पाऊँ हर हकीकत
बन जाऊँ आवाज़
हर मौन की
वो स्वर चाहता हूँ।
माँ भारती के सम्मान
में गर कट भी जाये
वो सर चाहता हूँ।
ख़्वाब बहुत नहीं
पर तमन्ना ये है
कि हर बेघर को
दे पाए महफूज आसरा
एक ऐसा घर चाहता हूँ।
@विकासडायरी